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Devotion

Aarti Sangrah

Traditional aarti of all major Hindu deities in Hindi. Recite these aartis during puja and worship.

Shri Ganesh Aarti

जय गणेश जय गणेश देवा

Refrain (repeat after each verse)

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

Verses 1

एकदन्त दयावन्त चार भुजा धारी। माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी॥

Verses 2

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥

Verses 3

अन्धन को आँख देत कोढ़िन को काया। बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥

Verses 4

दीनन की लाज राखो शम्भु सुतवारी। कामना को पूर्ण करो जय बलिहारी॥

Verses 5

'सूर' श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

Lord Shiva Aarti

ॐ जय शिव ओंकारा

Refrain (repeat after each verse)

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्धांगी धारा॥

Verses 1

एकानन चतुरानन पंचानन राजे। हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥

Verses 2

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे। तीनों रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥

Verses 3

अक्षमाला वनमाला रुण्डमाला धारी। चन्दन मृगमद सोहे भाले शशिधारी॥

Verses 4

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥

Verses 5

कर में श्रेष्ठ कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी। सुखकारी दुःखहारी जगपालनकारी॥

Verses 6

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥

Verses 7

त्रिगुण स्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥

Lord Vishnu (Jagdish) Aarti

ॐ जय जगदीश हरे

Refrain (repeat after each verse)

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

Verses 1

जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का। स्वामी दुख बिनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

Verses 2

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी। स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसकी॥

Verses 3

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

Verses 4

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। स्वामी तुम पालनकर्ता। मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥

Verses 5

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति। किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥

Verses 6

दीनबन्धु दुखहर्ता, ठाकुर तुम मेरे। स्वामी ठाकुर तुम मेरे। अपने हाथ उठाओ, अपनी शरण लगा लो॥

Verses 7

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। स्वामी पाप हरो देवा। श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥

Goddess Lakshmi Aarti

ॐ जय लक्ष्मी माता

Refrain (repeat after each verse)

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥

Verses 1

उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता। सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

Verses 2

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता॥

Verses 3

तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता। कर्म प्रभाव प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥

Verses 4

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥

Verses 5

तुम बिन यज्ञ न होता, वस्त्र न कोई पाता। खान पान का वैभव, सब तुमसे आता॥

Verses 6

शुभगुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि जाता। रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥

Verses 7

महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई जन गावे। सुर नर मुनि जन सेवत, सुख सम्पत्ति पावे॥

Goddess Durga (Ambe Maa) Aarti

जय अम्बे गौरी

Refrain (repeat after each verse)

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवजी॥

Verses 1

माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दो नैना, चन्द्रवदन नीको॥

Verses 2

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे। रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजे॥

Verses 3

केहरि वाहन राजत, खड़ग खप्पर धारी। सुर नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥

Verses 4

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥

Verses 5

शुम्भ निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥

Verses 6

चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु कैटभ दोऊ मारे, सुर भयहीन करे॥

Verses 7

ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

Verses 8

चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरों। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥

Verses 9

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भर्ता। भक्तन की दुख हर्ता, सुख सम्पत्ति कर्ता॥

Verses 10

भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥

Verses 11

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥

Verses 12

श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥

Goddess Saraswati Aarti

जय सरस्वती माता

Refrain (repeat after each verse)

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥

Verses 1

चन्द्रवदनी पद्मासिनी, द्युति मंगलकारी। सोहत शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥

Verses 2

बाएँ कर में वीणा, दाएँ कर माला। शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥

Verses 3

देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया। पैठि मंथरा दासी, रावण संहार किया॥

Verses 4

विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो। मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥

Verses 5

धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो। ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥

Verses 6

माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे। हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे॥

Lord Hanuman Aarti

आरती कीजै हनुमान लला की

Refrain (repeat after each verse)

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

Verses 1

जाके बल से गिरिवर काँपे। रोग दोष जाके निकट न झाँके॥

Verses 2

अंजनि पुत्र महा बलदाई। सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥

Verses 3

दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिय सुधि लाए॥

Verses 4

लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥

Verses 5

लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सँवारे॥

Verses 6

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि सजीवन प्राण उबारे॥

Verses 7

पैठि पाताल तोरि जम कारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥

Verses 8

बाएँ भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा सन्त जन तारे॥

Verses 9

सुर नर मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥

Verses 10

कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥

Verses 11

जो हनुमान जी की आरती गावे। बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥

Lord Krishna Aarti

आरती कुंजबिहारी की

Refrain (repeat after each verse)

आरती कुंजबिहारी की। श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

Verses 1

गले में बैजन्ती माला, बजावे मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झलकाला, नन्द के आनन्द नन्दलाला॥

Verses 2

गगन सम अंग कान्ति काली, राधिका चमक रही आली। लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चन्द्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की॥

Verses 3

कनकमय मोर मुकुट बिलसे, देवता दरसन को तरसे। गगन सों सुमन रासि बरसे, बजे मुरचंग, मधुर मृदंग, ग्वालिन संग, अतुल रति गोप कुमारी की॥

Verses 4

जहाँ ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा। स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच, चरन छवि श्री बनवारी की॥

Verses 5

चमकती उज्ज्वल तट रेणु, बज रही वृन्दावन बेणु। चहुँ दिसि गोपि ग्वाल धेनु, हँसत मृदु मन्द, चाँदनी चन्द, कटत भव फन्द, टेर सुनि दीन दुखारी की॥

Lord Ram Aarti

आरती श्री रामायण जी की

Refrain (repeat after each verse)

आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिय पी की॥

Verses 1

गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद, वाल्मीकि विद्वान। सुक सनकादिक शेष अरु शारद, बरनत पावन पीय पिय की॥

Verses 2

गावत वेद पुराण अष्टदश, छहों शास्त्र सब ग्रन्थन के। रस बरसावत तुलसीदास, मंगल कारन ललित लली की॥

Verses 3

नित पर सुन्दर सुख सम्पदा दायक, प्रेम-प्रकाशक तम-नाशक। रघुकुल भूषण दूषण-हारक, सकल कामना पूरन की॥

Verses 4

मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी। राम सिया राम सिया राम जय जय राम। राम सिया राम सिया राम जय जय राम॥

Santoshi Mata Aarti

जय संतोषी माता

Refrain (repeat after each verse)

जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता। अपने सेवक जन की, सुख सम्पत्ति दाता॥

Verses 1

सुन्दर चीर सुनहरी, माँ धारण कीन्हा। हीरा पन्ना दमके, माँ मोतिन का हार॥

Verses 2

गेरू लाल छटा छवि, माँ बदन पे छाई। भक्तों की दुख हरनी, माँ जगत सुखदाई॥

Verses 3

कानों में कुण्डल शोभे, माँ नासाग्रे मोती। कोटि कोटि भानु शशि, माँ राजत है ज्योती॥

Verses 4

स्वर्ण सिंहासन बैठीं, माँ चँवर ढुराये। पवन सहित झूलत हैं, माँ भक्तन मन भाये॥

Verses 5

गुड़ चना का भोग, माँ तुमको लगता। शुक्रवार को पूजे, माँ मन हरषाता॥

Verses 6

सन्तोषी माता की आरती, जो कोई जन गावे। ऋद्धि सिद्धि सुख सम्पत्ति, जी भर के पावे॥

Lord Shani Dev Aarti

जय जय श्री शनिदेव

Refrain (repeat after each verse)

जय जय श्री शनिदेव, भक्तन हितकारी। सूर्य पुत्र प्रभु छाया, महतारी प्यारी॥

Verses 1

श्याम अंग वक्र दृष्टि, चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बरधर नीलमय, छवि अति प्यारी॥

Verses 2

किरीट मुकुट छत्र, चमर कर धारी। कर में शस्त्र त्रिशूला, गदा वर धारी॥

Verses 3

परिधान पीत काषाय, मालिन्य विहीना। भक्तन की पीड़ा हरता, प्रभु शरण गहीना॥

Verses 4

सूर्यपुत्र शनि की आरती, जो कोई नर गावे। कहत कवीश्वर सुख सम्पत्ति, मनवांछित फल पावे॥

Lord Surya Dev Aarti

ॐ जय सूर्य भगवान

Refrain (repeat after each verse)

ॐ जय सूर्य भगवान, स्वामी जय सूर्य भगवान। सकल सृष्टि के स्वामी, तुम अन्तर्यामी॥

Verses 1

सारथी अरुण हैं प्रभु के, सप्त अश्व रथ मानो। कोटि कोटि तेजस्वी, हे किरणों के दाता॥

Verses 2

ऋग्, यजु, साम, अथर्व, तुम्हारा यश गाते। नमो नमो जग वन्दन, हे रश्मि रचैया॥

Verses 3

कुष्ठ मिटाओ मेरे, प्रभु सन्ताप हरो। प्रकाश सत्य का दो प्रभु, अन्धकार निवारो॥

Verses 4

सूर्यदेव की आरती, जो कोई नर गावे। मन इच्छित फल पावे, दुख दूर भगावे॥

Lord Vishwakarma Aarti

जय श्री विश्वकर्मा

Refrain (repeat after each verse)

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा। सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक स्तुति धर्मा॥

Verses 1

पंच वदन ब्रह्मरूप, दश भुजा धारी। स्वर्ण रत्न अलंकृत, सृष्टि अधिकारी॥

Verses 2

विमान रचे बहु प्रकार, देवन सुखदाता। लंका रची सुवर्णमयी, विधि विश्वविधाता॥

Verses 3

द्वारिका पुरी मनोहर, रची अति प्यारी। जगन्नाथ का मन्दिर, बनाए सुखकारी॥

Verses 4

विश्वकर्मा की आरती, जो कोई नर गावे। कहत प्रेमानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥

Shri Radha Aarti

आरती श्री वृषभानु लली की

Refrain (repeat after each verse)

आरती श्री वृषभानु लली की। मोहन मन मोहनी, प्यारी राधा प्यारी की॥

Verses 1

श्याम विहारिनि श्याम अधीना, नित्य निकुंज विहारिनि। संग सखी सब गावत गीता, प्रीति की रीति निभावन हारी की॥

Verses 2

मोर मुकुट पीताम्बर सोहे, कुण्डल की छवि न्यारी। गल वैजन्ती माल विराजत, रति की छवि पर वारी॥

Verses 3

यमुना तट पर रास रचावत, संग सखा सखियन के। नृत्य करत बजावत मुरली, मोहत मन गोकुल के॥

Verses 4

श्री राधा जी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत पदम दास स्वामी, मनवांछित फल पावे॥

Shri Sai Baba Aarti

आरती साईं बाबा

Refrain (repeat after each verse)

आरती साईं बाबा, सौख्यदातार जीवा। चरण रजा तली द्यावा, दासाँ विसावा। भक्ताँ विसावा, आरती साईं बाबा॥

Verses 1

जाळुनिया अनंग, स्वस्वरूपी राहे दंग। मुमुक्षजनां दावी, निज डोळां श्रीरंग। डोळां श्रीरंग, आरती साईं बाबा॥

Verses 2

जया मनी जैसा भाव, तया तैसा अनुभव। दावीसी दयाघना, ऐसी तुझी ही माव। तुझी ही माव, आरती साईं बाबा॥

Verses 3

तुमचे नाम ध्यातां, हरे संसृति व्यथा। अगाध तव करणी, मार्ग दावीसी अनाथा। दावीसी अनाथा, आरती साईं बाबा॥

Verses 4

कलियुगी अवतार, सगुण परब्रह्म साचार। अवतीर्ण झालासे, स्वामी दत्त दिगम्बर। दत्त दिगम्बर, आरती साईं बाबा॥

Goddess Parvati Aarti

जय पार्वती माता

Refrain (repeat after each verse)

जय पार्वती माता, मैया जय पार्वती माता। ब्रह्मा सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥

Verses 1

अरिकुल पद्म विनाशिनी, जय सेवक त्राता। जग जीवन जगदम्बा, हरिहर गुण गाता॥

Verses 2

सिंह को वाहन साजे, कुण्डल हैं साथा। देव वधू जो सेवत, नित उनके पाता॥

Verses 3

सतयुग रूप शील अति सुन्दर, नाम सती कहलाया। हेमाचल घर जन्मीं, सचा मैना माता॥

Verses 4

शुम्भ निशुम्भ विदारे, हेमाचल स्थाता। सहस भुजा तनु धरिके, चक्रहि लिए आता॥

Verses 5

सृष्टि रूप तुहीं है, जननी शिव संगा। महेश्वरी माँ तुम सब की, दुख हरनी माता॥

Verses 6

पार्वती माता की आरती, जो कोई जन गावे। रिद्धि सिद्धि धन पावे, मोक्ष फल पावे॥

Vaishno Devi (Sherawali) Aarti

अम्बे तू है जगदम्बे काली

Refrain (repeat after each verse)

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली। तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारें आरती॥

Verses 1

तेरे भक्त जनों पर माता, भीर पड़ी है भारी। दानव दल पर टूट पड़ो माँ, करके सिंह सवारी॥

Verses 2

सौ सौ सिंहों से तू बलशाली, अष्ट भुजाओं वाली। दुष्टों को तू चबा रही है, कर में खप्पर वाली॥

Verses 3

सुर मुनि जन ने तेरी स्तुति गाई, नर नारी जन गाओ। तेरे भवन तक हे माँ, आ पहुँचे हम सब सुखदाई॥

Verses 4

जब जब भीर पड़ी भक्तन पर, तूने ही आके सम्भाला। हर संकट में रक्षा की माँ, तूने ही भवन बुलाया॥

Verses 5

चरणों की सेवा हम पाएँ, ऐसा हो वर दो माता। दया दृष्टि रखना हम पर, हम हैं तेरे शरणागत॥

Mahakali Aarti

जय काली माता

Refrain (repeat after each verse)

जय काली माता, माँ जय काली माता। दुष्ट दलन अघहारिणी, शिव प्रिय जगमाता॥

Verses 1

तेरे तेज से थर थर काँपे, अरि दल भारी। मुण्ड माल तन पर सोहे, खप्पर तलवार धारी॥

Verses 2

दक्षिण काली भद्रकाली, कालरात्रि कहलाती। सृष्टि की तू जननी माता, संहार की भी दाता॥

Verses 3

रक्तबीज तूने संहारा, दैत्य दलन कर डाला। देव देवता तुझको ध्यावें, तू सबकी रखवाला॥

Verses 4

माँ काली की आरती, जो कोई नर गावे। भय संकट सब दूर हों, मनवांछित फल पावे॥

Ganga Maiya Aarti

ॐ जय गंगे माता

Refrain (repeat after each verse)

ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता। जो नर तुमको ध्यावत, मनवांछित फल पाता॥

Verses 1

चन्द्र सी जोत तुम्हारी, जल निर्मल शीतल। शरणागत की रक्षक, हर लेतीं संकट॥

Verses 2

शिव जटा में समाई, हरि चरणों से आईं। भागीरथ के तप से, धरती पर उतरीं माईं॥

Verses 3

तुम्हरा जल जो पीवे, वो नर तर जाता। पाप ताप सब हरतीं, तुम पावन गंगा माता॥

Verses 4

माँ गंगा की आरती, जो कोई जन गावे। सुख सम्पत्ति पावे, मुक्ति का फल पावे॥

Tulsi Mata Aarti

जय जय तुलसी माता

Refrain (repeat after each verse)

जय जय तुलसी माता, सब जग की सुख दाता। सब पापों को हरतीं, भवसागर से तारतीं॥

Verses 1

हरि के प्राणों से प्यारी, तुलसी नाम तुम्हारा। घर आँगन में तुम्हारे, बसे नारायण प्यारा॥

Verses 2

सुर मुनि जन तुझको पूजें, नर नारी सब गावें। तुलसी दल चढ़ाकर, वैकुण्ठ धाम पावें॥

Verses 3

शालिग्राम की प्रियतमा, वृन्दा नाम तुम्हारा। तुझ बिन पूजा अधूरी, प्रभु का श्रृंगार तुम्हारा॥

Verses 4

तुलसी माता की आरती, जो कोई जन गावे। सुख सम्पत्ति सन्तान, मनवांछित फल पावे॥

Kartikeya (Murugan) Aarti

जय जय आरती कार्तिक स्वामी

Refrain (repeat after each verse)

जय जय आरती कार्तिक स्वामी, षड्मुख जय शत्रु संहारी। मोर वाहन शिव के प्यारे, गंगा गौरी के दुलारे॥

Verses 1

तारकासुर तूने मारा, सुर सेना के तुम स्वामी। भक्तों के दुख हर लेते, हे स्कन्द अन्तर्यामी॥

Verses 2

शक्ति हाथ में शोभित, तेज तुम्हारा भारी। गणपति के अनुज प्यारे, कृतिका के तुम दुलारे॥

Verses 3

शिव पार्वती के लाला, षण्मुख षट्दल धारी। भक्तों की रक्षा करते, हे स्वामी कार्तिकेय भारी॥

Verses 4

कार्तिक स्वामी की आरती, जो कोई नर गावे। मन इच्छित फल पावे, विजय सदा घर आवे॥

Bhairav Baba Aarti

जय भैरव देवा

Refrain (repeat after each verse)

जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा। जय काली पुत्र प्रभु, शिव अंश जन सेवा॥

Verses 1

श्याम वर्ण तन सोहे, त्रिशूल कर धारी। डमरू कर विराजे, गल मुण्डमाला प्यारी॥

Verses 2

श्वान वाहन साजे, कर में खप्पर धारी। भक्तों के दुख हरते, प्रभु काशी अधिकारी॥

Verses 3

भूत प्रेत भय काटो, संकट सब हारो। अष्ट सिद्धि नव निधि दो, दास पर कृपा कारो॥

Verses 4

बाबा भैरव की आरती, जो कोई नर गावे। पाप ताप सब मिटें, सुख सम्पत्ति पावे॥

Khatu Shyam Aarti

ॐ जय श्री श्याम हरे

Refrain (repeat after each verse)

ॐ जय श्री श्याम हरे, स्वामी जय श्री श्याम हरे। निज भक्तों के तुमने, दुख पल में हरे॥

Verses 1

रत्न जड़ित सिंहासन, ऊपर विराजत हैं। कोटि रवि सम रूप सुहाना, प्रभु मुख शोभित है॥

Verses 2

मोर मुकुट सिर सोहे, पीत वसन तन पर। गल वैजन्ती माला, बंसी हाथों पर॥

Verses 3

हारे का सहारा बाबा, तेरा नाम है। खाटू में विराजे बाबा, तेरा धाम है॥

Verses 4

तीन बाण धारी बाबा, तेरी बलिहारी। शीश दान देने वाले, तुम श्याम मुरारी॥

Verses 5

श्याम बाबा की आरती, जो कोई नर गावे। हारे को सहारा दो प्रभु, मन इच्छित फल पावे॥

Yamuna Maiya Aarti

ॐ जय यमुना माता

Refrain (repeat after each verse)

ॐ जय यमुना माता, मैया जय यमुना माता। जो नर तुमको ध्यावत, सो पातक हर पाता॥

Verses 1

सूर्य पुत्री तुम माता, यम की तुम भगिनी। कालिंदी नाम तुम्हारा, ब्रज की तुम रंगिनी॥

Verses 2

श्री कृष्ण की तुम प्यारी, वृन्दावन में बहतीं। रास लीला की साक्षी, गोपियों संग रचतीं॥

Verses 3

तेरे जल में स्नान से, पाप सब कट जावें। दर्शन मात्र से माता, दुख सारे मिट जावें॥

Verses 4

यमुना माँ की आरती, जो कोई जन गावे। मनवांछित फल पावे, यम भय दूर भगावे॥

Lord Jagannath Aarti

जय जगन्नाथ स्वामी

Refrain (repeat after each verse)

जय जगन्नाथ स्वामी, नयन पथ गामी। भव पीड़ा हरने वाले, हे अन्तर्यामी॥

Verses 1

नील पर्वत सम तन सोहे, हे नीलाचल वासी। सुभद्रा बलराम संग, प्रभु पुरी के अधिवासी॥

Verses 2

रथ यात्रा में विराजो, भक्तों को दर्शन दो। दीन जनों के नाथ प्रभु, हम पर कृपा दो॥

Verses 3

चक्र नयन तुम्हारे, विश्व पालनहारे। दास तुम्हारे द्वारे, हे प्रभु दयासागर हारे॥

Verses 4

जगन्नाथ की आरती, जो कोई नर गावे। मोक्ष मुक्ति पावे, प्रभु दर्शन पावे॥

Common questions

When is aarti sung? +

Aarti is sung at the end of a puja ceremony. It is performed in temples and homes during both morning and evening worship. A lamp or camphor flame is waved before the deity during the aarti.

Why is a lamp lit during aarti? +

The lamp symbolizes the dispelling of darkness (ignorance) and the spreading of light (knowledge). Waving a ghee or oil lamp before the deity purifies the surroundings and removes negative energy.

Is aarti performed in languages other than Hindi? +

Yes, aartis exist in Marathi, Gujarati, Bengali, Tamil and other regional languages. This collection presents the most popular Hindi aartis sung across North India.

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