नित्य मंत्र
प्रातः स्मरण
लक्ष्मी, सरस्वती, गोविंद और धरती माता
नींद से उठते ही अपने हाथों और धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाला मंत्र।
कब जपें
सुबह बिस्तर से उठने से पहले, हथेली देखते हुए और पैर धरती पर रखने से पहले।
श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥
उच्चारण (रोमन)
Karagre Vasate Lakshmih Karamadhye Saraswati, Karamoole Tu Govindah Prabhaate Karadarshanam.
हिंदी में अर्थ
हथेली की उंगलियों में लक्ष्मी, हथेली के मध्य में सरस्वती, और हथेली के मूल भाग में गोविंद वास करते हैं। इसलिए सुबह उठते ही सबसे पहले अपने हाथों के दर्शन करने चाहिए।
श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले। विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे॥
उच्चारण (रोमन)
Samudra-Vasane Devi Parvata-Stana-Mandale, Vishnupatni Namastubhyam Paada-Sparsham Kshamasva Me.
हिंदी में अर्थ
हे देवी, समुद्र आपका वस्त्र है और पर्वत आपकी छाती हैं। हे विष्णुपत्नी धरती माता, आपको नमन। पैर से आपको छूने के लिए क्षमा कीजिए।
सामान्य प्रश्न
प्रातः स्मरण क्या है और इसका क्या महत्व है? +
नींद से उठते ही अपने हाथों और धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाला मंत्र।
प्रातः स्मरण कब जपना चाहिए? +
सुबह बिस्तर से उठने से पहले, हथेली देखते हुए और पैर धरती पर रखने से पहले।
प्रातः स्मरण का अर्थ क्या है? +
हथेली की उंगलियों में लक्ष्मी, हथेली के मध्य में सरस्वती, और हथेली के मूल भाग में गोविंद वास करते हैं। इसलिए सुबह उठते ही सबसे पहले अपने हाथों के दर्शन करने चाहिए।
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