शुभ-अशुभ समय
आज का राहु काल: शुरू और खत्म होने का समय
आपको मिलता है: राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल का शुरू और खत्म होने का समय, साथ में सूर्योदय और सूर्यास्त। मुफ़्त, साइनअप नहीं।
राहु काल क्या है?
राहु काल दिन के आठ बराबर हिस्सों में से एक है, जो सप्ताह के दिन के अनुसार तय होता है और परंपरागत रूप से नए शुभ कार्य (यात्रा शुरू करना, नया व्यापार, गृह प्रवेश) शुरू करने के लिए टाला जाता है।
यह हर दिन बदलता है क्योंकि सूर्योदय और सूर्यास्त का समय शहर और मौसम के साथ बदलता है, इसलिए राहु काल का सही समय जानने के लिए अपने शहर का सूर्योदय-सूर्यास्त ज़रूरी है, कोई तय घड़ी का समय नहीं।
यमगण्ड और गुलिक काल भी इसी तरह दिन को आठ हिस्सों में बाँटकर तय होने वाले, परंपरागत रूप से कम शुभ माने जाने वाले दो और समय-खंड हैं।
नतीजा कैसे पढ़ें
- राहु काल का समय चुने शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त से निकलता है, इसलिए शहर बदलने पर समय बदलता है।
- परंपरा में इस दौरान नया काम शुरू करने से बचा जाता है। जो काम पहले से चल रहा है, वह रोकने की बात नहीं है।
- यमगण्ड और गुलिक काल दो और ऐसे खंड हैं, जिन्हें परंपरा में कम अनुकूल माना जाता है।
राहु काल समझते समय होने वाले आम भ्रम
एक आम भ्रम 'राहु काल' को यह समझ लेना है कि यह बताता है कि ग्रह राहु आकाश में इस समय कहाँ है। ऐसा नहीं है: राहु काल सिर्फ़ सप्ताह के दिन के अनुसार दिन के घंटों का एक बँटवारा है, राहु की असली देशांतर या गोचर-स्थिति से इसका कोई लेना-देना नहीं। नाम इस बात से आता है कि इस समय-गणना पद्धति में यह हिस्सा 'राहु के अधीन' माना जाता है, किसी ग्रह-गणना से नहीं।
दूसरा भ्रम यह मान लेना है कि राहु काल हर जगह एक ही घड़ी-समय पर पड़ता है। यह किसी खास शहर के स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त से निकाला जाता है, इसलिए एक ही सप्ताह के दिन दिल्ली और मुंबई में अलग राहु काल विंडो देता है, और न्यूयॉर्क या लंदन से जाँचने वाले प्रवासी पाठक के लिए फिर अलग।
तीसरा भ्रम राहु काल को हर काम के लिए पूर्ण प्रतिबंध मान लेना है। परंपरागत रूप से इस दौरान सिर्फ़ नए, जानबूझकर शुरू किए जाने वाले काम (यात्रा शुरू करना, नया व्यापार, गृह प्रवेश) टाले जाते हैं; रोज़मर्रा का काम, दफ़्तर के काम या पहले से चल रहा काम रोकने का इरादा कभी नहीं था।
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सामान्य प्रश्न
राहु काल से जुड़े सवाल
राहु काल रोज़ एक ही समय पर क्यों नहीं होता? +
राहु काल दिन के आठ बराबर हिस्सों में से एक है, और दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक मापा जाता है। सूर्योदय-सूर्यास्त का समय शहर, मौसम और सप्ताह के दिन के साथ बदलता है, इसलिए राहु काल की शुरुआत और अवधि भी हर दिन थोड़ी बदलती है।
क्या राहु काल में कोई भी काम नहीं करना चाहिए? +
परंपरागत रूप से इसे नए शुभ कार्य (यात्रा शुरू करना, नया व्यापार, गृह प्रवेश) शुरू करने के लिए टाला जाता है। रोज़मर्रा के काम, दफ़्तर का काम या पहले से शुरू किया गया काम जारी रखने पर आमतौर पर यह लागू नहीं माना जाता।
यमगण्ड और गुलिक काल में क्या अंतर है? +
तीनों ही दिन को आठ बराबर हिस्सों में बाँटकर तय होते हैं, पर सप्ताह के हर दिन के लिए अलग हिस्से में आते हैं। तीनों परंपरागत रूप से नए शुभ कार्य के लिए कम अनुकूल माने जाते हैं।
क्या यह मुफ़्त है? +
हाँ, पूरी तरह मुफ़्त। अपने शहर का राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल देखें, कोई शुल्क नहीं।