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पंचांग · तिथि

आज की तिथि

आज की तिथि क्या है, यह कब तक चलेगी, और अगली तिथि कब आएगी। नई दिल्ली के अनुसार समय। दूसरे शहर के लिए पूरा पंचांग टूल खोलें।

गणना हो रही है...

तिथि क्या है?

तिथि पंचांग का पहला अंग है, यानी चंद्र-दिन। एक तिथि उस समय पूरी होती है जब चंद्रमा सूर्य से ठीक 12° आगे बढ़ जाता है, और नई तिथि तब शुरू होती है।

शुक्ल पक्ष में तिथि प्रतिपदा से पूर्णिमा (1 से 15) तक चलती है, और कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा से अमावस्या (16 से 30) तक। पूर्णिमा और अमावस्या इन दो पक्षों के अंतिम दिन हैं।

तिथि रोज़ बदलती है, पर उसका बदलने का सटीक समय शहर के अनुसार अलग होता है, यानी ऐसा हो सकता है कि सुबह एक तिथि हो और दोपहर तक अगली शुरू हो जाए। ऊपर दिया गया समय भारतीय मानक समय (IST) पर आधारित है।

सामान्य प्रश्न

तिथि से जुड़े सवाल

तिथि हर शहर में अलग क्यों होती है?

तिथि का सटीक बदलने का समय शहर के अक्षांश, देशांश और समय क्षेत्र पर निर्भर करता है। इसलिए एक ही कैलेंडर तारीख पर दो शहरों में अलग तिथि दिख सकती है, या एक ही तिथि की समाप्ति का समय अलग हो सकता है।

व्रत या पूजा किस तिथि के अनुसार करें?

अधिकतर व्रत सूर्योदय के समय की तिथि पर आधारित होते हैं (उदय-व्यापिनी), पर कुछ (जैसे प्रदोष व्रत) संध्या-काल की तिथि पर होते हैं। इस पन्ने की तिथि दोपहर 12 बजे IST पर देखी गई है, और समाप्ति का समय ऊपर दिया गया है, यह सटीक निर्णय के लिए पर्याप्त है।

रिक्ता तिथि क्या है और क्यों टाली जाती है?

चतुर्थी (4), नवमी (9) और चतुर्दशी (14) को रिक्ता तिथि कहा जाता है, यानी "खाली" तिथि। परंपरागत रूप से नए शुभ कार्य, विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीद, इन दिनों टाले जाते हैं, चाहे नक्षत्र अनुकूल हो।

पूर्णिमा और अमावस्या का महत्व क्या है?

पूर्णिमा (शुक्ल पक्ष की 15वीं तिथि) और अमावस्या (कृष्ण पक्ष की 15वीं तिथि) पक्ष के अंतिम दिन हैं। पूर्णिमा को कई प्रमुख व्रत होते हैं (सत्यनारायण, कोजागर, गुरु पूर्णिमा); अमावस्या पितृ-तर्पण और श्राद्ध के लिए महत्वपूर्ण है।