पंचांग · करण
आज का करण
आज का करण क्या है, यह कब तक चलेगा, और क्या यह चर या स्थिर करण है। नई दिल्ली के अनुसार समय। दूसरे शहर के लिए पूरा पंचांग टूल खोलें।
आज का करण
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करण क्या है?
करण पंचांग का पाँचवाँ अंग है। हर तिथि दो करणों की बनी होती है, यानी एक करण आधी तिथि का होता है। इसलिए एक चंद्र-मास (30 तिथि) में कुल 60 करण होते हैं।
ग्यारह करण हैं: चार स्थिर (शकुनि, चतुष्पद, नाग, किंस्तुघ्न, जो चंद्र-मास के अंत में एक बार आते हैं) और सात चर (बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि/भद्रा, जो चक्र में लौटते हैं)।
विष्टि करण (भद्रा) शास्त्रीय रूप से नए काम टालने के लिए जाना जाता है, इसका अपना अलग कैलेंडर भी है, नीचे लिंक देखें।
सामान्य प्रश्न
करण से जुड़े सवाल
करण और तिथि में क्या फ़र्क है?
तिथि पूरे चंद्र-दिन को नापती है (12° की चंद्र-सूर्य दूरी), जबकि करण उस तिथि का आधा हिस्सा है (6°)। इसलिए एक दिन में आमतौर पर दो करण चलते हैं।
विष्टि (भद्रा) करण में क्या टालें?
शास्त्रीय परंपरा में भद्रा के दौरान यात्रा शुरू, विवाह मुहूर्त, गृह प्रवेश जैसे विशेष कार्य टाले जाते हैं। रोज़मर्रा के कामों पर यह लागू नहीं माना जाता। अगले 14 दिनों की भद्रा-विंडो देखने के लिए हमारा अलग /bhadra पन्ना खोलें।
क्या "चर" और "स्थिर" करण का मतलब क्या है?
सात चर करण (बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि) पूरे चंद्र-मास में चक्र में बार-बार लौटते हैं। चार स्थिर करण (शकुनि, चतुष्पद, नाग, किंस्तुघ्न) महीने के अंत में, अमावस्या के आसपास, केवल एक-एक बार आते हैं।
करण मुहूर्त तय करने में क्या भूमिका निभाता है?
शुभ मुहूर्त पंचांग के पाँचों अंगों को मिलाकर तय होता है। करण में मुख्य ध्यान विष्टि (भद्रा) से बचने पर होता है; बाकी चर करण आमतौर पर तटस्थ माने जाते हैं।