नित्य मंत्र
भोजन मंत्र
अन्नदेवता
भोजन से पहले कृतज्ञता व्यक्त करने और भोजन को पवित्र मानने के लिए बोला जाने वाला मंत्र।
कब जपें
भोजन शुरू करने से ठीक पहले।
श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्। ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना॥
उच्चारण (रोमन)
Brahmarpanam Brahma Havir Brahmaagnau Brahmanaa Hutam, Brahmaiva Tena Gantavyam Brahmakarma-Samaadhinaa.
हिंदी में अर्थ
अर्पण करने की क्रिया ब्रह्म है, हवि ब्रह्म है, अग्नि ब्रह्म है, और अर्पण करने वाला भी ब्रह्म है। जो इस भाव से कर्म करता है, वह ब्रह्म को ही प्राप्त होता है।
श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रितः। प्राणापानसमायुक्तः पचाम्यन्नं चतुर्विधम्॥
उच्चारण (रोमन)
Aham Vaishvaanaro Bhootvaa Praaninaam Deham-Aashritah, Praana-Apaana-Samaayuktah Pachaamyannam Chaturvidham.
हिंदी में अर्थ
मैं वैश्वानर (जठराग्नि) रूप में प्राणियों की देह में वास करता हूँ, और प्राण-अपान वायु के सहयोग से चार प्रकार के अन्न को पचाता हूँ।
सामान्य प्रश्न
भोजन मंत्र क्या है और इसका क्या महत्व है? +
भोजन से पहले कृतज्ञता व्यक्त करने और भोजन को पवित्र मानने के लिए बोला जाने वाला मंत्र।
भोजन मंत्र कब जपना चाहिए? +
भोजन शुरू करने से ठीक पहले।
भोजन मंत्र का अर्थ क्या है? +
अर्पण करने की क्रिया ब्रह्म है, हवि ब्रह्म है, अग्नि ब्रह्म है, और अर्पण करने वाला भी ब्रह्म है। जो इस भाव से कर्म करता है, वह ब्रह्म को ही प्राप्त होता है।
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