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आरती

श्री गंगा माता की आरती

ॐ जय गंगे माता

टेक (हर पद के बाद दोहराएँ)

ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता। जो नर तुमको ध्यावत, मनवांछित फल पाता॥

पद 1

चन्द्र सी जोत तुम्हारी, जल निर्मल शीतल। शरणागत की रक्षक, हर लेतीं संकट॥

पद 2

शिव जटा में समाई, हरि चरणों से आईं। भागीरथ के तप से, धरती पर उतरीं माईं॥

पद 3

तुम्हरा जल जो पीवे, वो नर तर जाता। पाप ताप सब हरतीं, तुम पावन गंगा माता॥

पद 4

माँ गंगा की आरती, जो कोई जन गावे। सुख सम्पत्ति पावे, मुक्ति का फल पावे॥

सामान्य प्रश्न

श्री गंगा माता की आरती कब गाई जाती है? +

श्री गंगा माता की आरती पूजा के अन्त में गाई जाती है, सुबह या शाम दोनों समय। दीपक या कपूर की ज्योत से देवता के समक्ष आरती उतारी जाती है।

श्री गंगा माता की आरती का टेक क्या है? +

श्री गंगा माता की आरती का टेक है: "ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता।", जिसे हर पद के बाद दोहराया जाता है।

क्या श्री गंगा माता की आरती पूरी हिंदी में उपलब्ध है? +

हाँ, इस पृष्ठ पर श्री गंगा माता की आरती के सभी 4 पद पूरे हिंदी में दिए गए हैं।

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