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आरती

श्री कार्तिकेय (मुरुगन) की आरती

जय जय आरती कार्तिक स्वामी

टेक (हर पद के बाद दोहराएँ)

जय जय आरती कार्तिक स्वामी, षड्मुख जय शत्रु संहारी। मोर वाहन शिव के प्यारे, गंगा गौरी के दुलारे॥

पद 1

तारकासुर तूने मारा, सुर सेना के तुम स्वामी। भक्तों के दुख हर लेते, हे स्कन्द अन्तर्यामी॥

पद 2

शक्ति हाथ में शोभित, तेज तुम्हारा भारी। गणपति के अनुज प्यारे, कृतिका के तुम दुलारे॥

पद 3

शिव पार्वती के लाला, षण्मुख षट्दल धारी। भक्तों की रक्षा करते, हे स्वामी कार्तिकेय भारी॥

पद 4

कार्तिक स्वामी की आरती, जो कोई नर गावे। मन इच्छित फल पावे, विजय सदा घर आवे॥

सामान्य प्रश्न

श्री कार्तिकेय (मुरुगन) की आरती कब गाई जाती है? +

श्री कार्तिकेय (मुरुगन) की आरती पूजा के अन्त में गाई जाती है, सुबह या शाम दोनों समय। दीपक या कपूर की ज्योत से देवता के समक्ष आरती उतारी जाती है।

श्री कार्तिकेय (मुरुगन) की आरती का टेक क्या है? +

श्री कार्तिकेय (मुरुगन) की आरती का टेक है: "जय जय आरती कार्तिक स्वामी, षड्मुख जय शत्रु संहारी।", जिसे हर पद के बाद दोहराया जाता है।

क्या श्री कार्तिकेय (मुरुगन) की आरती पूरी हिंदी में उपलब्ध है? +

हाँ, इस पृष्ठ पर श्री कार्तिकेय (मुरुगन) की आरती के सभी 4 पद पूरे हिंदी में दिए गए हैं।

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