आरती
श्री तुलसी माता की आरती
जय जय तुलसी माता
टेक (हर पद के बाद दोहराएँ)
जय जय तुलसी माता, सब जग की सुख दाता। सब पापों को हरतीं, भवसागर से तारतीं॥
पद 1
हरि के प्राणों से प्यारी, तुलसी नाम तुम्हारा। घर आँगन में तुम्हारे, बसे नारायण प्यारा॥
पद 2
सुर मुनि जन तुझको पूजें, नर नारी सब गावें। तुलसी दल चढ़ाकर, वैकुण्ठ धाम पावें॥
पद 3
शालिग्राम की प्रियतमा, वृन्दा नाम तुम्हारा। तुझ बिन पूजा अधूरी, प्रभु का श्रृंगार तुम्हारा॥
पद 4
तुलसी माता की आरती, जो कोई जन गावे। सुख सम्पत्ति सन्तान, मनवांछित फल पावे॥
सामान्य प्रश्न
श्री तुलसी माता की आरती कब गाई जाती है? +
श्री तुलसी माता की आरती पूजा के अन्त में गाई जाती है, सुबह या शाम दोनों समय। दीपक या कपूर की ज्योत से देवता के समक्ष आरती उतारी जाती है।
श्री तुलसी माता की आरती का टेक क्या है? +
श्री तुलसी माता की आरती का टेक है: "जय जय तुलसी माता, सब जग की सुख दाता।", जिसे हर पद के बाद दोहराया जाता है।
क्या श्री तुलसी माता की आरती पूरी हिंदी में उपलब्ध है? +
हाँ, इस पृष्ठ पर श्री तुलसी माता की आरती के सभी 4 पद पूरे हिंदी में दिए गए हैं।
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