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नित्य और साप्ताहिक

सत्यनारायण पूजा विधि

भगवान सत्यनारायण (विष्णु)

गृह में सुख-समृद्धि, कार्य-सिद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए भगवान विष्णु के सत्यनारायण रूप का पूजन और कथा-श्रवण।

कब की जाती है
किसी भी महीने की पूर्णिमा को विशेष रूप से; इसके अलावा एकादशी, संकल्प-सिद्धि के दिन, गृह-प्रवेश, विवाह-वर्षगाँठ, नए काम की शुरुआत, या किसी मनोकामना के पूर्ण होने पर आभार-स्वरूप। शाम को सूर्यास्त से पहले शुरू करना उत्तम।
कुल समय
लगभग 2 से 2.5 घंटे: 45 मिनट पूजा, 60-75 मिनट कथा, फिर आरती और प्रसाद वितरण।

सामग्री सूची

सामग्री मात्रा कहाँ से लें
भगवान सत्यनारायण की तस्वीर या मूर्ति 1 किसी भी पूजा-सामग्री दुकान पर, या तस्वीर घर में हो तो वही
चौकी 1 —
लाल या पीला वस्त्र (चौकी पर बिछाने के लिए) 1 —
कलश (तांबे या पीतल का) 1 —
आम या अशोक के पत्ते 5 या 7 पत्ते —
नारियल (जटा वाला) 1 —
रोली, चंदन, अक्षत (टूटे हुए नहीं, साबुत चावल) थोड़ा-थोड़ा —
फूल और तुलसी दल एक थाली भर, तुलसी 11 पत्ती तुलसी घर के गमले से; अन्य पीले फूल श्रेष्ठ
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) हर सामग्री एक-एक चम्मच, मिलाकर एक कटोरी —
प्रसाद हेतु सिंजारा (गेहूँ का आटा, चीनी, केला, दूध, घी) आटा 250 ग्राम, चीनी 250 ग्राम, केला 5, दूध आधा लीटर, घी 100 ग्राम —
सत्यनारायण कथा की पुस्तक 1 गीता प्रेस गोरखपुर की प्रति सर्वश्रेष्ठ
दीपक, अगरबत्ती, कर्पूर दीपक 2 (एक शुद्ध घी का), अगरबत्ती 1 पैकेट, कर्पूर 10 टुकड़े —

चरण-दर-चरण विधि

  1. 01

    स्नान और स्थान की शुद्धि

    स्नान करके स्वच्छ धुले हुए वस्त्र पहनें, पुरुष धोती-कुर्ता या पीला वस्त्र, स्त्रियाँ पीली या लाल साड़ी। जिस कमरे में पूजा हो, वहाँ झाडू लगा कर पोंछा लगा दें, गंगाजल छिड़क दें। पूजा स्थल पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठने योग्य होना चाहिए।

  2. 02

    चौकी और कलश की स्थापना

    चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएँ। बीच में भगवान सत्यनारायण की तस्वीर या मूर्ति रखें। दायीं ओर कलश स्थापित करें: कलश में जल भरें, आम के 5 या 7 पत्ते ऊपर रखें, उन पर एक साबुत जटा वाला नारियल रखें, कलश पर लाल या पीले धागे का मौली लपेटें, और कलश के गले पर रोली से स्वस्तिक बनाएँ।

  3. 03

    दीप प्रज्वलन और संकल्प

    शुद्ध घी का दीपक जलाकर भगवान के सामने दायीं ओर रखें, तेल का दीपक बायीं ओर। हाथ में एक फूल, थोड़ा अक्षत, थोड़ा जल, और एक सुपारी लेकर संकल्प करें: अपना नाम, गोत्र (यदि मालूम हो), निवास-स्थान, तिथि, और यह पूजा क्यों कर रहे हैं: यह मन में या धीरे-धीरे बोलकर कहें। यह ही "संकल्प" है, इसीके साथ पूजा फल-दायी होती है।

    इस चरण का मंत्र

    ॐ विष्णवे नमः।

    Om Vishnave Namah.

    भगवान विष्णु को नमस्कार।

  4. 04

    गणेश और नवग्रह पूजन

    हर पूजा गणेश जी के आवाहन से आरंभ होती है ताकि विघ्न न आयें। एक सुपारी को गणेश-रूप मानकर उस पर रोली-चंदन-अक्षत-फूल चढ़ाएँ, "ॐ गं गणपतये नमः" 21 बार जपें। इसके बाद नवग्रहों का आवाहन: दायीं ओर एक कटोरी में 9 प्रकार के अक्षत या 9 सुपारियाँ रखें और "ॐ नवग्रहेभ्यो नमः" 3 बार जपें।

    इस चरण का मंत्र

    ॐ गं गणपतये नमः।

    Om Gam Ganapataye Namah.

    विघ्नहर्ता गणपति को नमस्कार।

  5. 05

    सत्यनारायण भगवान का आवाहन और षोडशोपचार पूजन

    भगवान की तस्वीर के सामने दोनों हाथ जोड़कर "ॐ श्री सत्यनारायणाय नमः" कहते हुए आवाहन करें। फिर सोलह उपचार क्रम से अर्पित करें: (1) आसन (फूल), (2) पाद्य (पैर धोने का जल), (3) अर्घ्य (हाथ धोने का जल), (4) आचमन (मुख शुद्धि जल), (5) स्नान: पंचामृत से, फिर शुद्ध जल से, (6) वस्त्र (मौली या पीला धागा), (7) यज्ञोपवीत (कच्चा सूत), (8) चंदन-रोली, (9) अक्षत, (10) पुष्प और तुलसी, (11) धूप, (12) दीप, (13) नैवेद्य (सिंजारा प्रसाद), (14) ताम्बूल (पान-सुपारी), (15) दक्षिणा (सिक्का), (16) आरती। हर उपचार पर "ॐ श्री सत्यनारायणाय नमः" कहें।

    इस चरण का मंत्र

    ॐ श्री सत्यनारायणाय नमः।

    Om Shri Satyanarayanaya Namah.

    सत्य के आधार भगवान नारायण को नमस्कार।

  6. 06

    सत्यनारायण कथा का पाठ

    गीता प्रेस से प्रकाशित सत्यनारायण कथा की पुस्तक से पाँच अध्याय पढ़ें, यही इस पूजा का प्राण है। घर के सब सदस्य कथा सुनने के लिए बैठें, ध्यान से सुनें। हर अध्याय के अंत में "ॐ श्री सत्यनारायणाय नमः" कहा जाता है। पहले अध्याय में नारद-नारायण संवाद, दूसरे में शतानंद ब्राह्मण की कथा, तीसरे में साधु व्यापारी और उसकी पुत्री कलावती की, चौथे में उन्हीं की समुद्री-यात्रा और अंत में राजा तुंगध्वज की कथा है। पूरी 5 अध्याय पढ़े बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।

  7. 07

    आरती और क्षमा-प्रार्थना

    कर्पूर या घी का दीप जलाकर "जय लक्ष्मी रमणा" की आरती करें (5 बार दाहिनी ओर घुमाते हुए)। घर के सब सदस्य ताली बजाकर साथ गाएँ। आरती के बाद हाथ जोड़कर क्षमा-प्रार्थना करें: "आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्, पूजा-विधिं न जानामि क्षमस्व परमेश्वर": अर्थात, हे भगवन्, मुझे न आवाहन का सही तरीका आता है, न विसर्जन का, न पूजा-विधि का, कृपया क्षमा करें। यह सबसे ज़रूरी बिंदु है, कोई भी चूक इस प्रार्थना से क्षम्य हो जाती है।

  8. 08

    प्रसाद वितरण और भोजन

    तैयार किया गया सिंजारा प्रसाद पहले भगवान को अर्पित करके फिर सब उपस्थित लोगों में बाँटें: पहले घर के बुज़ुर्गों को, फिर बच्चों को, फिर बाहर के अतिथियों को। कहीं-कहीं परंपरा है कि प्रसाद ग्रहण किए बिना कोई कथा-स्थल से न जाए। इसके बाद सादा शाकाहारी भोजन साथ में करें, पूजा के दिन प्याज़-लहसुन-मांस-मदिरा से पूर्णतया परहेज़ है।

आम भूल-चूकें

  • संकल्प (क्यों पूजा कर रहे हैं) कहे बिना पूजा शुरू कर देना। बिना संकल्प के पूजा फल-दायी नहीं मानी जाती।
  • तुलसी दल के बिना नैवेद्य अर्पित करना, विष्णु-पूजन में तुलसी अनिवार्य है, कम से कम एक पत्ती प्रसाद पर रखी जाए।
  • कथा के बीच में उठ जाना, फोन देखना, या बात करना। कथा का श्रवण ही मुख्य पुण्य है, बीच में उठना अशुभ माना जाता है।
  • सिंजारा प्रसाद में आटा भूनते समय गैस बहुत तेज़ रखना, प्रसाद कच्चा रह जाता है। धीमी आँच पर सुनहरा भूरा होने तक भूनना है।
  • क्षमा-प्रार्थना छोड़ देना। यह एक श्लोक ही उन सब त्रुटियों को क्षम्य कर देता है जो पूजा में अनजाने में हो जाती हैं।

आधुनिक घर के लिए बदलाव

  • अपार्टमेंट में जगह कम हो तो चौकी की जगह कोई ऊँचा स्टूल या कुर्सी पर वस्त्र बिछाकर काम चल जाता है, यज्ञ-वेदी की माँग नहीं है।
  • हवन की व्यवस्था न हो तो सिर्फ़ धूप और घी-दीप से भी पूजा पूर्ण मानी जाती है, यहाँ अग्नि-आहुति अनिवार्य नहीं है।
  • गंगा-जल न मिले तो शुद्ध पीने का जल पर्याप्त है, थोड़ा तुलसी दल डालकर उसे "गंगा-जल-रूप" संकल्पित किया जा सकता है।
  • सिंजारा प्रसाद बनाने में समय न हो तो पंजीरी, हलवा, या साफ-सुथरे फल भी नैवेद्य के रूप में स्वीकार्य हैं। सिंजारा पारंपरिक है, अनिवार्य नहीं।

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सामान्य प्रश्न

सत्यनारायण पूजा विधि क्यों की जाती है? +

गृह में सुख-समृद्धि, कार्य-सिद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए भगवान विष्णु के सत्यनारायण रूप का पूजन और कथा-श्रवण।

सत्यनारायण पूजा विधि कब की जाती है? +

किसी भी महीने की पूर्णिमा को विशेष रूप से; इसके अलावा एकादशी, संकल्प-सिद्धि के दिन, गृह-प्रवेश, विवाह-वर्षगाँठ, नए काम की शुरुआत, या किसी मनोकामना के पूर्ण होने पर आभार-स्वरूप। शाम को सूर्यास्त से पहले शुरू करना उत्तम।

सत्यनारायण पूजा विधि में कितना समय लगता है? +

लगभग 2 से 2.5 घंटे: 45 मिनट पूजा, 60-75 मिनट कथा, फिर आरती और प्रसाद वितरण।

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