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विष्णु मंत्र

विष्णु वंदना

भगवान विष्णु

शांति, संरक्षण और स्थिरता के लिए विष्णु की स्तुति।

कब जपें

विष्णु पूजा में, एकादशी पर, या किसी भी सुबह की प्रार्थना में।

संस्कृत श्लोक

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्॥ लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्। वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

उच्चारण (रोमन)

Shantakaram Bhujagashayanam Padmanabham Suresham, Vishvaadhaaram Gaganasadrisham Meghavarnam Shubhaangam. Lakshmikaantam Kamalanayanam Yogibhir-Dhyaanagamyam, Vande Vishnum Bhavabhayaharam Sarvalokaikanaatham.

हिंदी में अर्थ

शांत स्वरूप, शेषनाग पर शयन करने वाले, नाभि से कमल धारण करने वाले, देवताओं के स्वामी, सारे संसार के आधार, आकाश-सम विशाल, मेघवर्णी, लक्ष्मीपति, कमलनयन, योगियों के ध्यान में समाने वाले, और भवभय हरने वाले विष्णु को मेरा नमन।

सामान्य प्रश्न

विष्णु वंदना क्या है और इसका क्या महत्व है? +

शांति, संरक्षण और स्थिरता के लिए विष्णु की स्तुति।

विष्णु वंदना कब जपना चाहिए? +

विष्णु पूजा में, एकादशी पर, या किसी भी सुबह की प्रार्थना में।

विष्णु वंदना का अर्थ क्या है? +

शांत स्वरूप, शेषनाग पर शयन करने वाले, नाभि से कमल धारण करने वाले, देवताओं के स्वामी, सारे संसार के आधार, आकाश-सम विशाल, मेघवर्णी, लक्ष्मीपति, कमलनयन, योगियों के ध्यान में समाने वाले, और भवभय हरने वाले विष्णु को मेरा नमन।

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