महीना और साल तय होने के बाद भी अगला सवाल यही रहता है, “इस महीने में कौन सी तारीख़ ठीक रहेगी?” विवाह मुहूर्त जैसे महीना-स्तर के लेख शुरुआती दायरा देते हैं, पर उस दायरे के भीतर दिन छांटना अगला कदम है।

दिन की शुभता किन चार बातों से तय होती है

हर पंचांग-आधारित छनाई इन चार अंगों को साथ देखती है:

  • तिथि: रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) नए काम के लिए टाली जाती हैं, पूर्णा तिथियाँ (पंचमी, दशमी, पूर्णिमा) सबसे अच्छी मानी जाती हैं
  • नक्षत्र: हर कार्यक्रम के लिए शास्त्रों में तय किए गए अनुकूल नक्षत्रों की अपनी सूची है, विवाह की सूची गृह प्रवेश से अलग होती है
  • योग: सत्ताईस योगों में से नौ को अशुभ माना गया है, बाकी सामान्यतः ठीक
  • वार: कुछ कार्यक्रमों के लिए परंपरागत रूप से कुछ ख़ास वार टाले जाते हैं (जैसे विवाह के लिए शनिवार)

हर कार्यक्रम की अपनी सूची

गृह प्रवेश, विवाह, वाहन ख़रीद, व्यवसाय आरम्भ और यात्रा, हर एक की नक्षत्र-प्राथमिकता अलग होती है। इसीलिए एक ही तारीख़ किसी कार्यक्रम के लिए उत्तम और किसी दूसरे के लिए सिर्फ ठीक-ठाक हो सकती है।

महीने भर की तारीखों की एक साथ तुलना

एक-एक दिन का पंचांग निकालने की जगह, पूरे महीने या कई हफ़्तों की तारीखों को एक साथ स्कोर करके सबसे अच्छे दिन छांटना ज़्यादा तेज़ तरीका है।

अपने कार्यक्रम के लिए शुभ दिन खोजें

शुभ मुहूर्त खोजें पर कार्यक्रम चुनें, तारीख़ की सीमा चुनें, और हर दिन का स्कोर देखें। दिन तय होने के बाद, उसी दिन के राहु काल, यमगण्ड और अभिजित मुहूर्त के लिए मुहूर्त पेज पर अपना शहर चुनें।

जब कोई दिन पूरी तरह सही न मिले

कभी-कभी उपलब्ध तारीख़ों में से कोई भी दिन सभी चार अंगों में उत्तम नहीं होता, ऐसे में परंपरा में वरीयता का एक क्रम है: तिथि और वार को नक्षत्र व योग से ज़्यादा वज़न दिया जाता है। पंडित अक्सर “ठीक-ठाक” तारीख़ को पूरी तरह टालने की बजाय, कमज़ोर पहलू के लिए एक छोटा सा उपाय सुझाकर आगे बढ़ने की सलाह देते हैं।