महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का अभिषेक और रात्रि जागरण मुख्य परंपरा है। तारीख के लिए महाशिवरात्रि मुहूर्त लेख देखें।
अभिषेक सामग्री
- गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी (पंचामृत के लिए)
- बेल पत्र, धतूरा, आक के फूल
- भस्म, चंदन, सफेद फूल
अभिषेक और पूजा विधि
- सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें, यह निर्जला या फलाहारी दोनों तरह से रखा जा सकता है।
- शिवलिंग पर गंगाजल, फिर दूध, दही, शहद और घी क्रम से अर्पित करें।
- बेल पत्र, धतूरा और आक के फूल चढ़ाएं।
- रात के चारों प्रहर में यह अभिषेक दोहराया जाता है, हर प्रहर में मंत्र जाप के साथ।
- निशिता काल में विशेष पूजा और जागरण किया जाता है।
- अगले दिन प्रातः व्रत का पारण करें।
मुख्य मंत्र
ॐ नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
छोटी-छोटी बातें जो अक्सर छूट जाती हैं
बेलपत्र चढ़ाते समय उसकी चिकनी सतह नीचे और उल्टी सतह ऊपर की ओर होनी चाहिए, यह विवरण अक्सर पहली बार पूजा करने वालों को पता नहीं होता। शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ाई जाती, यह नियम कई लोगों को हैरान करता है क्योंकि बाकी पूजाओं में हल्दी शुभ मानी जाती है। तुलसी पत्र भी शिव पूजा में वर्जित है, जबकि विष्णु पूजा में अनिवार्य है, यह अंतर याद रखना ज़रूरी है।
रात भर जागरण संभव न हो तो
काम या स्वास्थ्य कारणों से पूरी रात जागना संभव न हो तो निशीथ काल के आसपास सिर्फ एक अभिषेक करके भी परंपरा निभाई जा सकती है। कई कामकाजी लोग शाम के पहले प्रहर में मंदिर जाकर अभिषेक करते हैं, फिर घर पर बाकी की रात मौन जाप करते हैं। मुहूर्त आदर्श स्थिति बताता है, अनिवार्य नियम नहीं।