महाशिवरात्रि 2027 में 6 मार्च, शनिवार को है, फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी के दिन।

पर्व का महत्व

यह भगवान शिव की महारात्रि है। मान्यता है कि इसी रात शिव-पार्वती का विवाह हुआ था, कुछ परंपराओं में इसे शिव के तांडव और सृष्टि के आरंभ से भी जोड़ा जाता है। रात्रि जागरण और चारों प्रहर की पूजा इस दिन की विशेष परंपरा है।

व्रत और उपवास के नियम

ज़्यादातर भक्त इस दिन निर्जल व्रत रखते हैं, कुछ फलाहार या दूध ले सकते हैं। व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण से टूटता है। रात भर जागरण करना कठिन हो तो कम से कम निशिता काल के आसपास एक अभिषेक कर लेना भी पर्याप्त माना जाता है। बेलपत्र चढ़ाते समय उसकी उल्टी सतह ऊपर होनी चाहिए, यह छोटी बात अक्सर पहली बार पूजा करने वालों को पता नहीं होती।

पूजा का सामान्य समय

रात के चार प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है, प्रत्येक प्रहर लगभग तीन घंटे का होता है। निशिता काल, आधी रात के आसपास, को पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

अपने शहर के लिए समय जांचें

निशिता काल का सही समय जानने के लिए मुहूर्त पेज पर अपना शहर चुनें। चतुर्दशी तिथि की अवधि पंचांग पेज पर भी देखी जा सकती है।