चैत्र नवरात्रि की घटस्थापना और नौ दिनों की पूजा विधि वही है जो शारदीय नवरात्रि में निभाई जाती है, विस्तृत विधि नवरात्रि पूजा विधि लेख में देखें। यहां चैत्र नवरात्रि की अपनी विशेष परंपराओं पर बात करते हैं।

गुड़ी पड़वा

महाराष्ट्र और आसपास के क्षेत्रों में इसी दिन गुड़ी (बांस की छड़ी पर रेशमी कपड़ा, नीम की पत्तियां और तांबे का कलश) घर के मुख्य द्वार पर बांधी जाती है, नए साल के स्वागत के प्रतीक स्वरूप।

नौ दिन रामायण पाठ

कई परिवार चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में रामचरितमानस या रामायण का अखंड पाठ करते हैं, जो राम नवमी को पूर्ण होता है।

नीम और गुड़ का प्रसाद

वर्ष के पहले दिन नीम की पत्तियां, गुड़ और इमली मिलाकर खाने की परंपरा है, जो जीवन के कड़वे-मीठे अनुभवों को स्वीकार करने का प्रतीक मानी जाती है।

क्षेत्रीय नाम, एक ही दिन

आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इसी दिन को उगादी कहा जाता है, वहां भी नीम और गुड़ मिलाकर खाने की वैसी ही परंपरा है, इसे उगादी पचड़ी कहते हैं। सिंधी समुदाय इसे चेटी चंड के रूप में मनाता है, झूलेलाल जी के जन्मदिन के रूप में। नाम और कुछ रीति-रिवाज़ अलग हैं, पर मूल भावना वही है, नई फसल और नए साल का स्वागत।

विदेश में गुड़ी पड़वा

जहां बांस की छड़ी या तांबे का कलश आसानी से न मिले, वहां कई परिवार किसी भी लंबी छड़ी पर रेशमी दुपट्टा बांधकर प्रतीकात्मक गुड़ी बना लेते हैं। नीम न मिलने पर कड़वे स्वाद के लिए करेला या मेथी का उपयोग भी कुछ परिवार करते हैं, भावना असली सामग्री से ज़्यादा मायने रखती है।