शारदीय नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों की नौ दिन आराधना की जाती है। तारीख और घटस्थापना मुहूर्त के लिए नवरात्रि मुहूर्त लेख देखें, यह लेख पूरे नौ दिनों की पूजा विधि पर केंद्रित है।
घटस्थापना सामग्री
- मिट्टी का कलश, गंगाजल या शुद्ध जल
- जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र
- आम के पत्ते, नारियल, कलावा
- दुर्गा जी की मूर्ति या तस्वीर, अखंड ज्योति के लिए घी का दीपक
घटस्थापना विधि
- पूजा स्थान की सफाई कर मिट्टी के पात्र में जौ बोएं।
- कलश में जल भरकर उसमें सुपारी, सिक्का डालें, ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें।
- कलश को जौ वाले पात्र के पास स्थापित करें।
- दुर्गा जी की मूर्ति के सामने अखंड ज्योति जलाएं, यदि नौ दिन जलाए रखने का संकल्प लें तो।
नौ दिनों का क्रम
नौ दिन माँ दुर्गा के नौ रूपों, शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक, की पूजा की जाती है। हर दिन सुबह-शाम आरती होती है, कई घरों में अष्टमी को हवन भी किया जाता है।
कन्या पूजन
अष्टमी या नवमी को छोटी कन्याओं को घर बुलाकर उनके पैर धोए जाते हैं, उन्हें भोजन कराया जाता है और उपहार दिए जाते हैं, उन्हें देवी का रूप मानकर। आमतौर पर 2 से 10 साल तक की उम्र की कन्याएं इसके लिए उपयुक्त मानी जाती हैं, हलवा-पूरी-चना का भोजन सबसे प्रचलित है, और साथ में एक बटुक भैरव (छोटा लड़का) को भी शामिल करने की परंपरा कुछ परिवारों में है।
विदेश में यह विधि निभाना
जहां आंगन न हो, वहां बालकनी या घर के भीतर एक कोने में छोटे पात्र में घटस्थापना की जा सकती है। कन्या पूजन के लिए बड़े भारतीय समुदाय वाले शहरों में मंदिर या हिंदू एसोसिएशन अक्सर सामूहिक आयोजन करते हैं, जहां कई परिवारों की बेटियां एक साथ शामिल हो जाती हैं, यह अकेले घर पर आयोजन करने से आसान विकल्प है।