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आरती

श्री विश्वकर्मा की आरती

जय श्री विश्वकर्मा

टेक (हर पद के बाद दोहराएँ)

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा। सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक स्तुति धर्मा॥

पद 1

पंच वदन ब्रह्मरूप, दश भुजा धारी। स्वर्ण रत्न अलंकृत, सृष्टि अधिकारी॥

पद 2

विमान रचे बहु प्रकार, देवन सुखदाता। लंका रची सुवर्णमयी, विधि विश्वविधाता॥

पद 3

द्वारिका पुरी मनोहर, रची अति प्यारी। जगन्नाथ का मन्दिर, बनाए सुखकारी॥

पद 4

विश्वकर्मा की आरती, जो कोई नर गावे। कहत प्रेमानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥

सामान्य प्रश्न

श्री विश्वकर्मा की आरती कब गाई जाती है? +

श्री विश्वकर्मा की आरती पूजा के अन्त में गाई जाती है, सुबह या शाम दोनों समय। दीपक या कपूर की ज्योत से देवता के समक्ष आरती उतारी जाती है।

श्री विश्वकर्मा की आरती का टेक क्या है? +

श्री विश्वकर्मा की आरती का टेक है: "जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा।", जिसे हर पद के बाद दोहराया जाता है।

क्या श्री विश्वकर्मा की आरती पूरी हिंदी में उपलब्ध है? +

हाँ, इस पृष्ठ पर श्री विश्वकर्मा की आरती के सभी 4 पद पूरे हिंदी में दिए गए हैं।

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