दीपावली मुहूर्त · कोलकाता
दीपावली 2026 · कोलकाता
रविवार, 8 नवंबर 2026
रोशनी का यह महापर्व पाँच दिन तक चलता है और लक्ष्मी-गणेश पूजा इसका मुख्य अनुष्ठान है। यहाँ पूरे पाँच दिन की तारीखें, लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त, ज़रूरी सामग्री की सूची, चरण-दर-चरण पूजा विधि, मंत्र और विदेश में रहने वालों के लिए विशेष जानकारी दी गई है।
शुभ मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 5:54 से 7:50 तक। प्रदोष काल: शाम 5:31 से 8:09 तक। निशीथ काल: रात 11:39 से 12:31 तक (नई दिल्ली)।
आज के सटीक समय
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इस पर्व से जुड़े दिन
शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
धनतेरस
रविवार, 8 नवंबर 2026
नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली)
रविवार, 8 नवंबर 2026
दीपावली
मंगलवार, 10 नवंबर 2026
गोवर्धन पूजा
बुधवार, 11 नवंबर 2026
भाई दूज
दीपावली की कथा और पूजा विधि
ऊपर के समय नई दिल्ली के हैं। कोलकाता के अपने सूर्योदय, सूर्यास्त और अभिजित मुहूर्त ऊपर के बॉक्स में लोड होते हैं। कथा, पूजा विधि और सामग्री की सूची मुख्य दीपावली पेज पर है।
पूरी जानकारी पढ़ें →मुहूर्त की गणना: प्रदोष काल, स्थिर लग्न और चौघड़िया
लक्ष्मी पूजा परंपरागत रूप से प्रदोष काल में की जाती है, यानी सूर्यास्त के तुरंत बाद का लगभग दो घंटे का समय, जब स्थिर लग्न (आमतौर पर वृषभ लग्न) उदय हो रहा हो। स्थिर लग्न में की गई पूजा में लक्ष्मी घर में स्थिर होकर वास करती हैं, ऐसी मान्यता है।
दिल्ली और आस-पास के क्षेत्रों में 8 नवंबर 2026 को प्रदोष काल शाम 5:31 से 8:09 तक रहेगा, और वृषभ स्थिर लग्न (लक्ष्मी पूजा मुहूर्त) शाम 5:54 से 7:50 तक। यह खिड़की हर शहर के सूर्यास्त के हिसाब से आगे-पीछे होती है, इसलिए अपने शहर का सटीक समय मुहूर्त पेज पर ज़रूर देखें।
रात के लिए महानिशीथ काल (रात 11:39 से 12:31) भी विशेष माना जाता है, जिसे परंपरा में तांत्रिक साधना और साधकों से जोड़ा जाता है। सामान्य गृहस्थ पूजा के लिए प्रदोष काल ही अनुशंसित है।
चौघड़िया: प्रदोष काल के भीतर शुभ, लाभ, या अमृत चौघड़िया का चुनाव करें। राहु काल से बचें। यह सारी जानकारी मुहूर्त पेज पर अपने शहर के लिए एक साथ मिल जाएगी।
सामान्य प्रश्न
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दीपावली 2026 कब है? +
दीपावली 2026, 8 नवंबर (रविवार) को है। यह पाँच दिन के पर्व का तीसरा और मुख्य दिन है, जो धनतेरस (6 नवंबर) से शुरू होकर भाई दूज (11 नवंबर) पर खत्म होता है।
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? +
दिल्ली में प्रदोष काल शाम 5:31 से 8:09 तक और वृषभ स्थिर लग्न (लक्ष्मी पूजा मुहूर्त) शाम 5:54 से 7:50 तक। अपने शहर का सटीक समय मुहूर्त पेज पर देखें, क्योंकि यह हर शहर के सूर्यास्त के हिसाब से बदलता है।
पूजा में कौन-सी मूर्ति कहाँ रखनी चाहिए? +
श्रद्धालु की दिशा से देखें तो गणेश जी बाईं ओर और लक्ष्मी जी दाईं ओर रखी जाती हैं। गणेश जी हमेशा माँ लक्ष्मी के दाईं ओर होते हैं (यानी आपके बाएँ)। बीच में कलश और आगे दीपक रखें। श्रद्धालु का मुख पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए।
क्या पूजा में कमल का फूल ज़रूरी है? +
कमल माँ लक्ष्मी का प्रिय पुष्प माना जाता है, इसलिए यदि उपलब्ध हो तो अवश्य चढ़ाएँ। न मिले तो लाल गुलाब, चमेली या मौसमी फूल भी चलेंगे। कमलगट्टे की माला भी लक्ष्मी मंत्र जप में विशेष फलदायी मानी जाती है।
क्या दीपावली की तारीख हर साल बदलती है? +
हाँ, दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है, जो चंद्र पंचांग पर आधारित है, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर में हर साल अलग तारीख आती है। सामान्यतः यह अक्टूबर के अंत या नवंबर के पहले पखवाड़े में पड़ती है।
विदेश में रहने वालों को समय कैसे तय करना चाहिए? +
IST का समय सीधे अपने टाइमज़ोन में बदलने के बजाय, अपने शहर के सूर्यास्त के हिसाब से प्रदोष काल निकालें। USA, UK, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और गल्फ के लिए अलग विस्तृत गाइड नीचे लिंक में दी गई हैं।
बहीखाता पूजा (चोपड़ा पूजन) कब की जाती है? +
व्यापारी वर्ग बहीखाता पूजा दीपावली की शाम, लक्ष्मी-गणेश पूजा के साथ ही करते हैं। नए बहीखाते पर स्वस्तिक, ॐ और श्री गणेशाय नमः लिखकर उनकी पूजा की जाती है। यह विक्रम संवत के अनुसार नए वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।
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