नरक चतुर्दशी पर दो मुख्य परंपराएं निभाई जाती हैं: सुबह का अभ्यंग स्नान और शाम का यम दीपदान। तारीख के लिए नरक चतुर्दशी मुहूर्त लेख देखें।
सामग्री
- तिल का तेल, उबटन (हल्दी-चंदन का लेप)
- चार बत्ती वाला मिट्टी का दीपक (यम दीपक)
- सरसों का तेल, आटा या मैदा का दीपक बनाने के लिए
विधि
- सूर्योदय से पहले शरीर पर तिल के तेल और उबटन की मालिश करें, फिर स्नान करें। इसे नरक से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।
- शाम को घर के मुख्य द्वार के बाहर, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके चार बत्ती वाला यम दीपक जलाएं।
- यम दीपक जलाते समय यमराज से अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना करें।
- घर के हर कोने में दीप जलाकर छोटी दिवाली मनाएं।
ध्यान रखने योग्य बात
यम दीपक हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके ही जलाया जाता है, यह एकमात्र दिन है जब दीपक इस दिशा में जलाया जाता है। बाकी सभी पूजा और त्योहारों में दक्षिण दिशा में दीपक जलाना वर्जित माना जाता है, क्योंकि यह दिशा यमराज की मानी जाती है, इसलिए इस अपवाद को याद रखना ज़रूरी है ताकि गलती से हर दिन इस दिशा में दीपक न जलाया जाए।
विदेश में यह विधि निभाना
तिल का तेल न मिले तो सरसों या जैतून का तेल भी इस्तेमाल किया जा सकता है, महत्वपूर्ण मालिश और स्नान की क्रिया है, तेल का प्रकार गौण है। मिट्टी का चार बत्ती वाला दीपक न मिले तो साधारण दीये में चार बत्तियां एक साथ जलाकर भी यह परंपरा निभाई जा सकती है।