हनुमान जयंती पर हनुमान जी की मूर्ति पर सिंदूर-चोला चढ़ाना और चालीसा पाठ मुख्य परंपरा है। तारीख के लिए हनुमान जयंती मुहूर्त लेख देखें।

पूजा सामग्री

  • सिंदूर, चमेली का तेल
  • लाल फूल, विशेषकर गुड़हल
  • पान का पत्ता, लड्डू या बूंदी का भोग
  • हनुमान चालीसा या सुंदरकांड की प्रति

विधि

  1. सुबह स्नान कर हनुमान मंदिर या घर के मंदिर में जाएं।
  2. सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर मूर्ति पर चोला चढ़ाएं।
  3. लाल फूल और पान का पत्ता अर्पित करें।
  4. हनुमान चालीसा का पाठ करें, संभव हो तो सुंदरकांड भी।
  5. लड्डू या बूंदी का भोग लगाकर प्रसाद बांटें।

सिंदूर चढ़ाने की कथा

मान्यता है कि हनुमान जी ने माता सीता को सिंदूर लगाते देख पूछा तो सीता जी ने बताया कि यह श्रीराम की दीर्घायु के लिए है। इस पर हनुमान जी ने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया, यह भाव उनकी अपार भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

घर पर पूजा करते समय

जिनके पास हनुमान मंदिर पास में न हो, वे घर के मंदिर में भी यही विधि निभा सकते हैं, बड़ी मूर्ति या तस्वीर दोनों पर सिंदूर-चोला चढ़ाया जा सकता है। मंगलवार और शनिवार को नियमित रूप से हनुमान चालीसा पढ़ने वाले भक्तों के लिए जयंती का दिन एक विशेष अवसर होता है, इस दिन सुंदरकांड का पूरा पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है।