दशहरे पर तीन प्रमुख परंपराएं निभाई जाती हैं: शमी वृक्ष पूजन, शस्त्र पूजा और रावण दहन। तारीख के लिए दशहरा मुहूर्त लेख देखें।
पूजा सामग्री
- शमी वृक्ष के पत्ते (या शमी न मिले तो अशोक के पत्ते)
- घर के शस्त्र, वाहन, या औजार (शस्त्र पूजा के लिए)
- रोली, अक्षत, फूल, दीप
पूजा विधि
- सुबह शस्त्र, वाहन या अपने व्यवसाय के औजारों की पूजा करें, रोली-अक्षत लगाकर।
- अपराह्न काल में शमी वृक्ष के नीचे जाकर पूजा करें और शमी के पत्ते तोड़ें।
- शमी के पत्तों को “सोना” कहकर परिवार और मित्रों को भेंट करें, एक-दूसरे को विजयादशमी की शुभकामना दें।
- शाम को रावण दहन स्थल पर जाकर रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन देखें।
नीलकंठ दर्शन की परंपरा
इस दिन नीलकंठ पक्षी को देखना शुभ माना जाता है, यह भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। पुराने समय में राजा-महाराजा शिकार पर निकलने से पहले नीलकंठ के दर्शन का इंतज़ार करते थे, आज भी कई परिवार इस दिन शाम को आसमान की ओर देखकर इस पक्षी को खोजने की कोशिश करते हैं, हालांकि शहरों में यह अब दुर्लभ होता जा रहा है।
शमी वृक्ष की कथा
शमी वृक्ष पूजन की परंपरा पांडवों की कथा से जुड़ी है, अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने अपने शस्त्र शमी वृक्ष की खोखल में छिपाए थे, विजयादशमी के दिन उन्हें वापस निकालकर सफलतापूर्वक युद्ध शुरू किया। इसी वजह से शमी को विजय और साहस का प्रतीक माना जाता है, और यह परंपरा आज भी शस्त्र पूजा के साथ जुड़ी हुई है।