देव उठनी एकादशी 2026, शुक्रवार, 20 नवंबर को कार्तिक शुक्ल एकादशी पर है। इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है।

यह दिन क्या दर्शाता है

इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग-निद्रा से जागते हैं, जिससे चातुर्मास समाप्त होता है। विवाह और अन्य शुभ समारोह इसी दिन से फिर शुरू होते हैं। अगले दिन तुलसी विवाह मनाया जाता है, जो विवाह सीज़न की औपचारिक शुरुआत को चिह्नित करता है।

चातुर्मास और उसका असर

चातुर्मास के चार महीनों में नए विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, यही कारण है कि जुलाई से नवंबर के बीच शादी के निमंत्रण कम मिलते हैं। देव उठनी एकादशी के बाद यह प्रतिबंध हट जाता है, इसलिए नवंबर के अंत से फरवरी तक भारत में विवाह सीज़न अपने चरम पर होता है। कई परिवार इसी दिन के आसपास सगाई और मुहूर्त-निर्धारण की बातचीत शुरू करते हैं।

पूजा का समय

शाम की पूजा में शंख और घंटी की ध्वनि से भगवान विष्णु को जगाया जाता है। घर के आंगन में गन्ने के मंडप के नीचे तुलसी और शालिग्राम का प्रतीकात्मक विवाह कराया जाता है। एकादशी का व्रत सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी पारण तक चलता है।

अपने शहर की टाइमिंग जाँचें

सही पारण समय के लिए अपना शहर चुनकर मुहूर्त पेज देखें। एकादशी तिथि की अवधि पंचांग पेज पर भी देखी जा सकती है।