बुद्ध पूर्णिमा पर दान, ध्यान और पीपल वृक्ष की पूजा की जाती है। तारीख के लिए बुद्ध पूर्णिमा लेख देखें।
सामग्री
- सफेद फूल, दूध, धूप-दीप
- पीपल वृक्ष के नीचे जल अर्पण के लिए जल पात्र
- दान के लिए वस्त्र, अन्न या धन
विधि
- सुबह स्नान कर सफेद वस्त्र धारण करें।
- पीपल वृक्ष के नीचे जाकर जल अर्पित करें और दीप जलाएं, बुद्ध को विष्णु अवतार मानकर पूजा करते हुए।
- कुछ समय मौन ध्यान करें, यह बुद्ध की शिक्षाओं के अनुसार विशेष महत्व रखता है।
- गरीबों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।
- विष्णु सहस्रनाम का पाठ कई हिंदू परिवारों में इस दिन किया जाता है।
मुख्य मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय और बौद्ध परंपरा में बुद्धं शरणं गच्छामि।
पीपल वृक्ष का महत्व
पीपल के पेड़ को इस दिन विशेष महत्व दिया जाता है क्योंकि माना जाता है कि बुद्ध को ज्ञान-प्राप्ति बोधगया में इसी वृक्ष के नीचे हुई थी, जिसे बोधि वृक्ष कहा जाता है। हिंदू परंपरा में भी पीपल को पवित्र माना जाता है, कई लोग इस दिन पीपल की परिक्रमा करते हुए 108 बार जल अर्पित करते हैं। जिनके पास पीपल का पेड़ आसपास न हो, वे किसी भी मंदिर में या घर के तुलसी पौधे के पास दीप जलाकर भी यह पूजा कर सकते हैं, वृक्ष विशेष नहीं, भावना ज़रूरी है।
दान का महत्व
इस दिन किया गया दान सामान्य दिनों से कई गुना फलदायी माना जाता है, विशेषकर अन्न, वस्त्र और जल-पात्र का दान। कई परिवार इस दिन पक्षियों के लिए दाना-पानी रखने की भी परंपरा निभाते हैं, क्योंकि करुणा और अहिंसा बुद्ध की मूल शिक्षाओं में केंद्रीय स्थान रखते हैं।