हरियाली तीज 2026 में 15 अगस्त, शनिवार को है, श्रावण शुक्ल तृतीया के दिन।
व्रत का महत्व
विवाहित स्त्रियाँ पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन के लिए यह निर्जला या फलाहारी व्रत रखती हैं। यह माँ पार्वती के शिवजी को पति रूप में पाने की तपस्या का स्मरण है। सावन के हरे रंग की परंपरा के अनुसार महिलाएं हरी चूड़ियाँ, हरी साड़ी पहनती हैं और झूला झूलती हैं।
पूजा का सामान्य समय
तीज की पूजा आमतौर पर शाम के समय शिव-पार्वती की संयुक्त मूर्ति या चित्र के सामने की जाती है। दिन में कोई विशेष प्रदोष या अभिजित मुहूर्त तय नहीं है, तृतीया तिथि के दौरान किसी भी सुविधाजनक समय पर पूजा की जा सकती है।
तीज त्योहारों की श्रृंखला
सावन में तीन तीज पर्व आते हैं, हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज, तीनों का मूल भाव पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना है, पर हर एक की रीति थोड़ी अलग है। मायके से मिठाई और सिंजारा (चूड़ी, मेहंदी, श्रृंगार सामग्री) भेजने की परंपरा भी इस मौसम में निभाई जाती है, कई बेटियां हरियाली तीज पर मायके जाकर झूला झूलती हैं और सहेलियों के साथ मेहंदी लगाती हैं।
अपने शहर के लिए समय जांचें
व्रत तोड़ने का समय और शाम की पूजा के लिए मुहूर्त पेज पर अपना शहर चुनकर सूर्यास्त और राहु काल देख लें। तृतीया तिथि की अवधि पंचांग पेज पर भी देखी जा सकती है।