मांगलिक दोष (मंगल दोष) विवाह-मिलान में सबसे अधिक पूछे जाने वाले विषयों में से एक है। यह 36 गुणों से अलग गिना जाता है।
मांगलिक दोष कब बनता है
जब मंगल लग्न, चंद्र या शुक्र से 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में स्थित हो, तो कुंडली मांगलिक मानी जाती है। तीनों — लग्न, चंद्र और शुक्र — से देखा जाता है।
दोनों कुंडलियों में जाँच
मिलान में वर और वधू दोनों की मांगलिक स्थिति देखी जाती है। एक प्रचलित नियम यह है कि यदि दोनों मांगलिक हों, तो दोष परस्पर निष्प्रभावी माना जाता है।
अंक से अलग, पर साथ में
मांगलिक स्थिति गुण मिलान के 36 अंकों में नहीं जुड़ती — इसे अलग ध्वज (flag) के रूप में दिखाया जाता है, ताकि तस्वीर स्पष्ट रहे।
अपनी मांगलिक स्थिति जाँचें
मांगलिक जाँच पेज पर अपनी कुंडली की मांगलिक स्थिति देखें, या सीधे कुंडली मिलान करें।
यह जानकारी वर्णनात्मक है; यह विवाह का निर्णय नहीं देती।