कुंडली मिलान में अकेले अंक (गुण) काफ़ी नहीं होते, कुछ दोष अलग से जाँचे जाते हैं, चाहे अंक कितने भी अच्छे क्यों न हों।

मांगलिक दोष

जब मंगल लग्न, चंद्रमा या शुक्र से 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो, तो कुंडली मांगलिक मानी जाती है। परंपरागत रूप से अगर दोनों पक्ष मांगलिक हों, तो दोष को परस्पर कटा हुआ माना जाता है। मांगलिक दोष कैसे जाँचा और काटा जाता है, इसका पूरा विवरण यहाँ देखें।

नाड़ी दोष

नाड़ी दोष तब बनता है जब दोनों की नाड़ी एक जैसी हो। इसे अष्टकूट के आठों कूट में सबसे भारी दोष माना गया है, ज़्यादा अंक होने पर भी इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जाता।

भकूट दोष

भकूट दोष चंद्र राशियों के बीच के विशेष संबंधों से बनता है, और इसे संतान व पारिवारिक सुख से जोड़कर देखा जाता है।

दोष का मतलब हमेशा “न” नहीं

हर दोष के लिए परंपरागत रद्दीकरण (कैंसिलेशन) के नियम भी मौजूद हैं। इसलिए दोष होने का मतलब सीधे इनकार नहीं, पूरी तस्वीर देखनी ज़रूरी है।

अपनी कुंडली की जाँच करें

मांगलिक जाँच से शुरुआत करें, या पूरा विश्लेषण कुंडली मिलान टूल पर देखें। पूरी प्रक्रिया के लिए कुंडली मिलान गाइड पढ़ें।

यह जानकारी वर्णनात्मक है; यह विवाह का निर्णय नहीं देती।