“आपकी राशि क्या है?” पूछे जाने पर ज्यादातर लोग एक ही जवाब देते हैं, पर वैदिक ज्योतिष में तीन अलग-अलग राशियां होती हैं, और तीनों अलग काम के लिए इस्तेमाल होती हैं।

लग्न राशि

जन्म के समय पूर्व दिशा में उदय होती राशि लग्न कहलाती है। यह हर 2 घंटे में बदलती है, इसलिए इसकी गणना के लिए सटीक जन्म समय ज़रूरी है। लग्न का महत्व पूरी कुंडली की बुनियाद माना जाता है, भाव और योग इसी से गिने जाते हैं।

चंद्र राशि

जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में हो, वही चंद्र राशि है। भारत में जब कोई अपनी “राशि” बताता है, आमतौर पर यही मानी जाती है। दैनिक, साप्ताहिक और मासिक राशिफल, गुण मिलान और साढ़े साती, सब चंद्र राशि पर आधारित होते हैं।

सूर्य राशि

जन्म के समय सूर्य जिस राशि में हो, वह सूर्य राशि है। पश्चिमी ज्योतिष (सन साइन) में यही मुख्य राशि मानी जाती है, इसलिए विदेशी पत्रिकाओं का राशिफल अक्सर सूर्य राशि पर आधारित होता है। वैदिक ज्योतिष में सूर्य राशि आत्मबल और पहचान से जुड़ी मानी जाती है, पर मुख्य गणना में उतना इस्तेमाल नहीं होती जितना चंद्र राशि।

कौन सी कहां इस्तेमाल होती है

  • रोज़ का राशिफल, गुण मिलान, साढ़े साती: चंद्र राशि
  • कुंडली के भाव, योग, दशा: लग्न
  • पश्चिमी सन-साइन राशिफल: सूर्य राशि

अपनी तीनों राशियां जानें

कुंडली टूल पर जन्म विवरण डालकर तीनों राशियां एक साथ देखी जा सकती हैं।

यह जानकारी वर्णनात्मक है।