गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता गणेश जी की प्रतिमा घर या पंडाल में स्थापित कर दस दिन पूजा की जाती है। तारीख और शुभ मुहूर्त की जानकारी गणेश चतुर्थी मुहूर्त वाले लेख में है; यहां पूजा कैसे करें, सामग्री क्या चाहिए और नियम क्या हैं, यह सब है।
पूजा की सामग्री
- गणेश जी की मूर्ति (मिट्टी की प्रतिमा पर्यावरण के लिए बेहतर मानी जाती है)
- चौकी और लाल या पीला कपड़ा
- कलश, नारियल, सुपारी, अक्षत (साबुत चावल)
- रोली, चंदन, हल्दी-कुमकुम
- दूर्वा (दूब घास) की 21 गांठें
- लाल फूल, खासकर गुड़हल
- जनेऊ, मौली
- दीपक, घी, कपूर, अगरबत्ती
- मोदक या लड्डू, पंचामृत, पान का पत्ता
स्थापना और पूजा विधि
- पूजा स्थान साफ करें और स्नान के बाद पूजा का संकल्प लें।
- मूर्ति को चौकी पर लाल कपड़े के ऊपर, घर के ईशान (उत्तर-पूर्व) कोण में मुख उत्तर या पूर्व की ओर रखें।
- कलश स्थापित करें, गणेश जी को अक्षत, रोली, चंदन का तिलक करें।
- दूर्वा अर्पित करें, यह गणेश जी को सबसे प्रिय मानी जाती है।
- फूल चढ़ाएं, दीपक और धूप जलाएं।
- मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
- मंत्र जाप और आरती करें, फिर परिक्रमा करें।
- प्रसाद परिवार और आगंतुकों में बांटें।
मंत्र और आरती
- बीज मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः
- गणेश गायत्री: ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ति प्रचोदयात्
- आरती: “जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा” रोज सुबह-शाम गाई जाती है।
दस दिन क्या करें
जब तक मूर्ति घर में रहे, रोज सुबह-शाम आरती करें, दूर्वा और फूल ताज़ा बदलते रहें, और मोदक का भोग लगाते रहें। मूर्ति के आसपास साफ-सफाई और शांति बनाए रखें।
जरूरी नियम: क्या करें, क्या न करें
- गणेश चतुर्थी की रात चंद्रमा देखना वर्जित माना गया है; इसे मिथ्या कलंक (झूठे आरोप) से जोड़ा जाता है। अनजाने में चांद दिख जाए तो स्यमंतक मणि की कथा से जुड़ा श्लोक पढ़ने की परंपरा है।
- टूटी या खंडित मूर्ति घर न लाएं।
- पूजा के दिनों में घर में सात्विक भोजन और स्वच्छता का ध्यान रखें।
- मिट्टी की मूर्ति चुनें, प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्ति नदी-तालाब में घुलती नहीं और प्रदूषण बढ़ाती है।
विसर्जन विधि
विसर्जन से पहले अंतिम आरती करें और पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें। मूर्ति को ढोल-ताशे के साथ विसर्जन स्थल तक ले जाकर “गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या” के जयकारे के साथ जल में विसर्जित करें। सटीक विसर्जन मुहूर्त के लिए मुहूर्त पेज पर अपना शहर चुनकर उस दिन का राहु काल देखें।
यह जानकारी सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। परिवार या मंडल की परंपरा और पंडित की सलाह को भी उतना ही महत्व दें।